छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा जिले में शिक्षा विभाग के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी की कार्यशैली को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री टी.पी. उपाध्याय पर भ्रष्टाचार, मनमानी, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और शासन निर्देशों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत कर हटाने की मांग की है।
शिक्षा विभाग में युक्तिकरण प्रक्रिया के दौरान प्रभारी अधिकारी पर शिक्षकों से पैसे लेकर मनचाही जगहों पर पदस्थ करने का आरोप है। साथ ही उद्योग मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र को नजरअंदाज कर, अपने स्तर पर निर्णय लेने और अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने की भी बात सामने आई है। इसके अलावा करोड़ों रुपये के टेंडर मनमानी तरीके से जारी किए गए और जब मीडिया में घोटाले की खबरें छपीं, तब आनन-फानन में टेंडर को निरस्त कर दिया गया – जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में जब जनप्रतिनिधियों ने जिले में अटैच शिक्षकों की जानकारी मांगी, तो प्रभारी डीईओ कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर सदस्यों ने नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि शिक्षा विभाग के प्रमुख के पास यदि इतनी बुनियादी जानकारी नहीं है, तो जवाबदेही किससे तय की जाए?
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रभारी अधिकारी पद के योग्य नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद का दायित्व सौंपा गया है और वे लगातार मनमानी व घोटाले कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकारी के कारनामों का विस्तृत दस्तावेज तैयार कर लिया गया है और जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में जिला पंचायत प्रतिनिधि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं, जिसमें प्रभारी डीईओ के कार्यकाल में हुए अनियमितताओं को उजागर किया जाएगा। टेंडर घोटाला, शिक्षकों की अटैचमेंट में गड़बड़ी, विभागीय पारदर्शिता की कमी और शासन के आदेशों की उपेक्षा जैसे मुद्दों पर तथ्यात्मक प्रमाण भी पेश किए जाएंगे।
वही हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसे शिक्षक को 2 लाख रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था जो डीईओ और बीईओ का हवाला देकर रिश्वत ले रहा था बता दे बीईओ अग्रवाल कोरबा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय से कई वर्षों से जमे हुए हैं वही प्रभारी डीईओ उपाध्याय भी कांग्रेस के शासनकाल से डीईओ का प्रभार लेकर कोरबा जिले में पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, एक ही जगह पद पर बने रहना कहीं ना कहीं रिश्वत लेने वाले शिक्षक के आरोप पर मोहर लगती दिख रही है
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार विशेषकर मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या प्रभारी अधिकारी को हटाया जाएगा या मामले को दबाने की कोशिश होगी? शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में इस तरह की अनियमितताएं ना केवल प्रशासन की साख पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि जिले के भविष्य यानी बच्चों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, सुर्खियां न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है,जुड़े रहिए हमारे साथ ।

















