छत्तीसगढ़/कोरबा :- विकासखंड करतला के ग्राम उमरेली स्थित जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति मर्यादित ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना, संसाधनों का बेहतर उपयोग और निरंतर मेहनत से ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
समिति ने ग्राम पंचायत के सिंघरी तालाब, पुरैनहा तालाब, घेसरा डबरी और डबरी तालाब, जिनका कुल रकबा 8.972 हेक्टेयर है, को 10 वर्षों के लिए लीज पर लेकर संगठित रूप से मछली पालन शुरू किया।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा समिति को 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज (अंगुलिका), मछली पकड़ने के जाल तथा मछली संरक्षण एवं विक्रय के लिए आइस बॉक्स उपलब्ध कराए गए। इससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और कार्य को गति मिली।
समिति की कार्यप्रणाली की खासियत यह है कि हर तालाब का उपयोग उसके अनुरूप किया जा रहा है। एक तालाब को नर्सरी के रूप में विकसित किया गया है, जबकि अन्य तालाबों में फसल विविधीकरण के तहत विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। इनमें कतला, रोहू, मृगल, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, चिताला, पंगास और रूपचंद प्रमुख हैं।
समिति के सदस्य स्वयं मत्स्याखेट कर मछलियों को सीधे हाट-बाजार में बेचते हैं। बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से उन्हें बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में समिति को प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपये से अधिक की आय हो रही है, जिसका लाभ सभी 25 सदस्यों को मिल रहा है।
पंचायतों के छोटे-छोटे तालाबों का यदि शासन की नीति के अनुरूप दीर्घकालीन पट्टे पर वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जाए, तो ग्रामीणों को स्थायी और सशक्त आय का स्रोत मिल सकता है। जय सिंगारासती मछुआ सहकारी समिति आज “सहकार से समृद्धि” की अवधारणा का एक प्रेरक और जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।



















