छत्तीसगढ़/कोरबा :- एसईसीएल कुसमुंडा खदान में कोयला चोरी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के चार ट्रकों से कुल 84 टन अवैध कोयला जब्त किया गया है, जिससे खदान से जुड़े माफिया नेटवर्क और एसईसीएल अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एसईसीएल रोड सेल के अधिकारियों ने नियमित निरीक्षण के दौरान चार संदिग्ध ट्रकों को पकड़ा। जब इनकी रॉयल्टी पर्चियों और लोडिंग दस्तावेजों की गहन जांच की गई, तो गड़बड़ियां उजागर हुईं। दस्तावेजों के अनुसार, ट्रकों में 35 टन पासिंग था, लेकिन वास्तविक लोडिंग में 20 टन वैध और 15 टन अवैध कोयला पाया गया।
कोयला चोरी का ‘पासिंग’ खेल
जांच में खुलासा हुआ कि कोयला माफिया और ट्रांसपोर्टर मिलकर ऐसा नेटवर्क चला रहे हैं जिसमें ‘सड़क खराब’ का बहाना बनाकर ट्रकों में आधा कोयला वैध रूप से लोड किया जाता है और बाकी 15 टन चोरी का कोयला खदान के भीतर ही चोरी-छिपे ट्रक में भर दिया जाता है। इस तकनीक से ट्रक के पासिंग वैध होने के बावजूद वह फुल लोड दिखाई देता है और सुरक्षा जांच से बच निकलता है।
क्या SECL के भीतर है मिलीभगत?
जानकारों का मानना है कि इतनी सुनियोजित चोरी बिना आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं है। अब जांच एजेंसियों के लिए यह एक चुनौती है कि वे केवल ट्रक या ट्रांसपोर्ट कंपनी तक सीमित न रहें, बल्कि इस पूरे भ्रष्टाचार के नेटवर्क की तह तक पहुंचें।
सख्त कार्रवाई की मांग
84 टन कोयले की यह बरामदगी किसी छोटी चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित गिरोह की ओर इशारा करता है, जिसकी जड़ें कोयला प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम में गहराई तक फैली हो सकती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचाया जाता है।
















