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भावना एवं भक्ति से प्रभु की प्राप्ति सम्भव:: पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी “महाराज”

छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा में 9 दिवसीय भव्य रामकथा का आयोजन गोयल परिवार पताड़ी – तिलकेजा वालो के द्वारा दीनदयाल मार्केट पावर हाउस रोड स्थित पीली कोठी में किया जा रहा है। जिसमे वृंदावन से पधारे पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी “महाराज” द्वारा कथा वाचन किया जायेगा।  कथा के पहले दिन 24 दिसंबर को प्रातः 11 बजे सप्तदेव मंदिर से कथा स्थल पीली कोठी तक भव्य कलश यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गयी। जिसमे माताएं-बहनों सहित शहर के गणमान्य नागरिकों  ने भाग लिया, 
आज प्रथम दिवस कथा को प्रारम्भ करते हुए वृन्दावन से पधारे कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने गुरू एवं नाम महिमा के साथ भावना एवं भक्ति की सुन्दर व्याख्या की। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि गुरू का अर्थ है कि अपने शिष्य को सदैव अन्धकार मय जीवन से मुक्त कर प्रकाश की ओर बढ़ाने का मार्गदर्शन करते हैं। भगवान शिव सम्पूर्ण विश्व के गुरू है, मां पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव मानस जैसी गंगा की कथा सुनाई-भगवान शिव ने मां पार्वती से कहे कि आप ऐसी ज्ञान रूपी गंगा के विषय की कथा सुनाने को कहा जिसमें सम्पूर्ण विश्व का कल्याण सम्भव होगा-गंगा तो गंगोत्री से चलकर गंगा सागर तक
कुछ क्षेत्रों में रह जाती है- सम्पूर्ण मानव समाज को अपने क्षेत्र से चलकर गंगा में डुबकी लगाने हेतु आना पड़ता है, परन्तु राम चरित मानस रूपी गंगा विश्व के प्रत्येक जनों तक स्वयं
पहुंचेगी अर्थात् गुरू वही है जो मनुष्य को परमात्मा से जोड़ दे।
उन्होंने आगे बताया की गुरू नरहरीदास की कृपा से एक साधारण सा बालक श्रीराम चरित मानस के रचयिता बन गये। संत तुलसी दास जी बालकाल में भूखों रहते थे, लोग अपने दरवाजे पर खड़े नहीं होने देते थे, लेकिन बड़े होने पर मानस की रचना करने के बाद बड़े-बड़े राजा पांव धोते थे।
यह केवल गुरू कृपा है। आगे कथा व्यास कहा कि कलियुग में नाम की बड़ी महिमा है, राम-नाम भगवत एक ऐसा साधन है जो मानव समाज को इस भाव सागर से पार उतार देता है, राम-नाम की महिमा गाकर भक्त प्रहलाद, बालक ध्रुव, भक्त मीराबाई, सन्त रविदास, सन्त कबीर, संत रहीम, सदन कसाई एवं अजामिल जैसे अनेक भक्त नाम का स्मरण कर साक्षात देवलोक पहुँच गये। राम-नाम के रस में डूबकर चैतन्य महाप्रभु ने आज लाखों हिन्दू एवं
ईसाई को वैष्ण्णव बना दिये। माँस-मदिरा लहसुन का परित्याग कर विश्व के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता स्टीफन स्पील वर्ग एवं हालीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री जूलिया रावर्ट्स साथ ही लन्दन के उद्योगपति मिस्टर फोर्ड राम-नाम की महिमा के कारण
आज वैष्णव हो गये। लाखों ईसाई हिन्दू धर्म स्वीकार करके वृन्दावन एवं देश के अनेक धार्मिक स्थलों पर भगवत नाम का गुणगान करते हुए माला जाप रहे है। आज इन्हीं भक्तों के सहयोग से वृन्दावन में भव्य मन्दिर चन्द्रोदय मन्दिर बनना शुरू हो गया, जिसका भूमि पूजन भारत केतत्कालीन  राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के कर कमलों से हुआ। आगे कथा व्यास ने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं में सुधार करे उसे हंस कहते है और जो स्वयं के साथ दूसरों के जीवन में सुधार कर सद्गुणों के मार्ग पर चलाते है उसे परमहंस कहते है।
छोटे से काली मंदिर के पुजारी स्वामी रामकृष्ण जी बालक नरेन्द्र को स्वामी विवेकानन्द बना दिये, जिसके कारण वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस कहलाये। मनुष्य के शरीर में सात ऐसे
दरवाजे हैं – दो कान, दो आंख,श्नाक, एक मुख जो इसका सद्उपयोग करता है अर्थात् कैसा देखना, क्या सुनना, क्या खाना, क्या सूंघना इस पर जो विचार करता है वह परमहंस हो जाता है। इस कलियुग में केवल नाम ही आधार है- “कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतराहि पारा” आज की कथा के दौरान बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

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