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मातृत्व अवकाश के बाद आवेदिका का वेतन रोका विभाग के उच्चाधिकारियों को पक्षकार बनाने के दिये निर्देश

पुलिस आरक्षक की सेवा समाप्ति की अनुशंसा, कमिश्नर रायपुर को भेजा गया पत्र, दिव्यांग आवेदिका को काम करने के समय में मिली राहत।

महिला आरक्षक द्वारा उप निरीक्षक के खिलाफ कार्यस्थल पर प्रताड़ना का मामला, आयोग ने एस.पी. दुर्ग को दिया जांच का आदेश

छत्तीसगढ़/रायपुर :-  छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 392 वी. एवं रायपुर जिले में 181 वी. जनसुनवाई की गई।
आज एक प्रकरण के दौरान आवेदिका ने बताया कि वह शिक्षिका है और उसे आंखों की विकलांगता है दिव्यांग कोटे से उन्हें नौकरी मिली है और अनावेदक विभाग के उच्चाधिकारी है। आवेदिका केा रात के समय काम करने में दिक्कत आती है। इसलिए 4 बजे के बाद उसे कोई क्लास न दिया जाये। आयोग द्वारा समझाईश दिये जाने पर अनावेदक पक्ष इस बिंदु पर सहमत हुआ। इस समझाईश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने मातृत्व अवकाश से संबंधित प्रकरण में सुनवाई किया गया जिसमें आवेदिका की ओर से उनके पति उपस्थित थे जिन्होने बताया कि उनकी पत्नी छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज संघ में सीनियर एक्जीक्यूटिवं संविदा के पद पर सितंबर 2021 से कार्यरत् है। उक्त अवधि का सीआर तैयार नहीं हुआ था। जिसके कारण आवेदिका का सेवा संविदा नियुक्ति का नवीनीकरण नहीं हुआ। इस कारण आवेदिका का वेतन भी रूका हुआ है। इस प्रकरण में आयोग ने निर्देश दिया कि अन्य व्यक्तियों को पक्षकार बनाना आवश्यक है ताकि आगामी सुनवाई में आवेदिका के मातृत्व अवकाश से संबंधित प्रकरण का निराकरण किया जा सके।

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एक अन्य प्रकरण मे अनावेदक पुलिस आरक्षक है और वर्तमान मे तेलीबांधा थाने मे पदस्थ है। पिछली सुनवाई मे अनावेदक ने आयोग के समक्ष यह स्वीकार किया था कि उसका वेतन 40 हजार रू. है और आवेदिका को प्रतिमाह 15 हजार रू. भरण-पोषण के लिए देगा। लेकिन आज दिनांक अनावेदक ने आवेदिका को किसी भी प्रकार का भरण-पोषण नहीं दिया है। अनावेदक पुलिस आरक्षक ने अपने पुलिस की नौकरी का रौब दिखाकर आवेदिका को 2 साल से छोड़ रखा है। आयोग द्वारा अनावेदक को कहा कि वह जुलाई 2025 से अब तक 15000 रू. प्रतिमाह भरण-पोषण आवेदिका के खाते मे जमा करें। ऐसा नहीं करने की स्थिति में अनावेदक पुलिस अधिक्षक की सेवा समाप्ति की अनुशंसा डी.जी.पी. छ.ग. शासन से की जायेगी।
एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक उनके पारिवारिक रिश्तेदार है और प्रगति नगर झण्डा चैक पंडरी में उनकी संयुक्त सम्पत्ति है जिसके कुल 4 हिस्सेदार है वह आवेदिकागण के ससुर की संपत्ति थी। उनकी मृत्यु पश्चात् फौती में सभी का नाम चढ़ा है। आवेदिकागण के सास की भी मृत्यु हो चुकी है। समस्त सम्पत्ति पर अनावेदक द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। आयोग की समझाईश पर अनावेदक ने कहा कि वह कोई ताला नही लगायेगा व आवेदिकागणों के अपनी सम्पत्ति पर आने से कोई विरोध नही करेगा। आयोग ने कहा कि यदि अनावेदकगण विरोध करते है तो वह अनावेदकगणों के खिलाफ थाना मे एफ.आई.आर. दर्ज करा सकेंगी।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक पति-पत्नि है और उनके 10 व 5 साल के दो बच्चे है। आवेदिका डेढ़ साल से अपने मायके मे है। अनावेदक (पति) आवेदिका को बच्चों से मिलने नहीं देता है। आवेदिका अपने पति एवं बच्चों के साथ रहना चाहती है। अनावेदक शासकीय स्कूल में शिक्षक है और 50 हजार रू. वेतन है। लेकिन उसने अब तक आवेदिका को कोई गुजारा भत्ता नही दिया है। अनावेदक ने आयोग के समक्ष कहा कि उनके बच्चों से बात करके कोई निर्णय लिया जाये। आयोग के समक्ष बच्चों से बात किये जाने पर बच्चों ने बताया कि उनके पापा(अनावेदक) कहते है कि आवेदिका (मम्मी) से तलाक होने पर वह दूसरी शादी करेंगे। अनावेदक आवेदिका से तलाक लिए बिना दूसरे विवाह का सपना देख रहा है। जो बच्चों के भविष्य के लिए उचित नहीं है। आयोग ने समझाईश दिया कि वह आवेदिका को बच्चों के साथ मिलने दे व प्रतिमाह 10 हजार रू. भरण-पोषण दें। यदि अनावेदक आवेदिका को उसके बच्चों से मिलने नही देता है तो आवेदिका अनावेदक के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करा सकेगी।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका थाना- धमधा में अनावेदक की अधीनस्थ कर्मचारी है फरवरी 2026 में उसका गर्भपात हुआ था। ऐसी स्थिति में वह ड्यूटी करने में असमर्थ थी। उसके बावजूद अनावेदक द्वारा उसे ड्यूटी करने के लिये मजबूर किया व अभद्र भाष का प्रयोग किया। आयोग द्वारा अनावेदक से पूछे जाने पर उसने कहा कि आवेदिका ने उसे गर्भपात की जानकारी नही दी थी। ड्यूटी मे अन्य कर्मचारी की उपलब्धता नहीं होने के कारण आवेदिका को कार्य करने के लिये बोला गया था। उभय पक्षों के अनुसार दोनो पक्षों की शिकायत की जांच एस.पी. दुर्ग द्वारा की जा रही है। आयोग ने कहा एस.पी. दुर्गसे प्रतिवेदन मंगाये जाने के बाद ही प्रकरण सुना जा सकेगा। साथ ही एस.पी दुर्ग को आवेदिका के डेढ वर्ष का छोटा बच्चा होने व गर्भपात होने की वजह से उसकी ड्यूटी धमधा के नजदीकी थाना में किये जाने की बाद भी पत्र के माध्यम से की जायेगी, ताकि वह अपनी सेवा के साथ परिवार का तालमेल बैठा सके।

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