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कोरबा नगर निगम क्षेत्र में देबू की जमीन पर चल रहे भारी मात्रा में अवैध लाल ईट भट्ठे, जेसीबी से हो रहा अवैध मिट्टी का उत्खनन, राजस्व का हो रहा नुकसान

छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा शहर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत देबू द्वारा अधिग्रहित जमीन पर दर्जनों अवैध लाल ईट के भट्ठे संचालित हो रहे हैं इन अवैध ईंट भट्ठो के माध्यम से भू माफिया भी सक्रिय नजर आ रहे हैं जिसमें एक पूर्व पार्षद की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है, जो देबू द्वारा अधिग्रहित जमीन को अपनी निजी भूमि बताकर अवैध ईंट बनवा रहा, और लाखों की बिक्री कर रहा, वही जेसीबी के माध्यम से भारी मात्रा में मिट्टी का अवैध उत्खनन कर खेत बनाया जा रहा और लाखों की अवैध कमाई की जा रही है जहां अवैध तरीके से लाल ईट बनाई जा रही वहीं अवैध तरीके से मिट्टी उत्खनन कर बची भी जा रही है जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है और खेत बनाकर उस जमीन पर कब्जा भी किया जा रहा है,         

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बता दें लगभग 29 वर्ष पहले 1994-95 में साउथ कोरिया की कंपनी देवू ने कोरबा जिले के गांव रिस्दी और आसपास के जमीन का अधिग्रहण कर 1000 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने के लिए तत्कालीन मध्यप्रदेश की दिग्विजय सरकार से करार किया था. लेकिन 29 साल बाद भी यहां ना तो पावर प्लांट लग पाया ना ही ग्रामीणों को तय शर्तों के अनुसार नौकरी मिली, रिस्दी की 260 एकड़ सहित रिस्दा, पंडरीपानी और कुरूडी को मिलाकर बड़े पैमाने पर जमीनों का अधिग्रहण किया था. 250-250 एकड़ अलग-अलग सरकारी जमीन भी प्लांट के लिए चयनित की गई थी. तब देवू ने 3 लाख रुपए प्रति एकड़ के भाव से ग्रामीणों को मुआवजा दिया था, लेकिन आज तक देबू कंपनी नीव तक नहीं रख पाई, हाई कोर्ट में मामला भी चल रहा है, दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल में एमपीईबी ने बिजली खरीदने का अनुबंध किया था. तब देवू ने 100 करोड़ रुपए गारंटी मनी के रूप में जमा किए थे. लेकिन बाद में देवू कंपनी दिवालिया हो गई. प्लांट लगा नहीं. अब देबू अपनी 100 करोड रुपए की राशि वापस पाना चाहता है,       

अब ग्रामीण भी उस जमीन को नहीं देना चाह रहे हैं इसीलिए कई ग्रामीणों ने अब उस जमीन पर मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया है वहीं कई ऐसे जमीन मालिक हैं जो उस जमीन को भूल चुके हैं और कहीं और चले गए हैं अब ऐसी जमीनों पर कुछ लोगों की नजर लगी हुई है जो अपनी निजी जमीन बात कर अवैध ईट भट्ठो के माध्यम से जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं । इतने बड़े पैमाने पर अवैध लाल ईट के भट्ठे शहर के भीतर देबू की जमीन पर चल रहे हैं जिस पर संबंधित अधिकारियों की भी नजर नहीं पड़ रही है, अवैध ईट कारोबारी जहां लाखों की अवैध कमाई कर रहे हैं वहीं राजस्व को क्षति पहुंचा रहे हैं ।

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