प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 145 मैदानी कर्मियों का एकदिवसीय प्रशिक्षण, कृत्रिम गर्भाधान से लेकर टीकाकरण तक की दी गई तकनीकी जानकारी
छत्तीसगढ़/कोरबा :- प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत पशुधन विकास विभाग के निर्धारित संकेतकों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी विकासखंडों से मैदानी स्तर पर कार्यरत पशु चिकित्सक, पैरावेट्स, पीएआईडब्ल्यू एवं पशु सखियों सहित कुल 145 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले को योजना के निर्धारित लक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना का वास्तविक लाभ किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही जरूरी है। इसके लिए कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं का टीकाकरण, किसान क्रेडिट कार्ड तथा हरा चारा विकास जैसे प्रमुख कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित करने पर जोर दिया।
मैदानी अमले की भूमिका महत्वपूर्ण
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि निर्धारित संकेतकों की पूर्ति केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पशुपालकों तक पहुंचे। उन्होंने मैदानी अमले को गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा कर कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष प्रयास करने पर भी जोर दिया।
कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकी बारीकियां समझाईं
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. एस.एन. मिश्रा ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत पशुधन विकास विभाग से संबंधित कार्यक्रमों एवं निर्धारित संकेतकों की जानकारी दी। उन्होंने मैदानी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्ष्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में डॉ. मयंक गोस्वामी ने कृत्रिम गर्भाधान विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सीमेन के उचित रखरखाव, कृत्रिम गर्भाधान के दौरान आवश्यक सावधानियों तथा बेहतर गर्भधारण दर सुनिश्चित करने के तकनीकी पहलुओं को उदाहरण सहित समझाया। पशुधन की नस्ल सुधार और पशुपालकों की आय बढ़ाने में कृत्रिम गर्भाधान की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
मदकाल की पहचान और समाकालन पर भी प्रशिक्षण
डॉ. एच.के. सोनी ने पशुओं में मदकाल की सही पहचान, समाकालन तथा इससे जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षणार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशुओं में सही समय पर प्रजनन संबंधी प्रक्रिया अपनाने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान पशु रोग नियंत्रण, टीकाकरण, हरा चारा विकास, किसान क्रेडिट कार्ड सहित विभागीय गतिविधियों के प्रभावी संचालन पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने मैदानी अमले को योजना के प्रत्येक संकेतक पर विशेष ध्यान देते हुए निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पशुधन विकास विभाग के मैदानी अमले की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना रहा।












