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चलते ट्रक में सफर कर कोरबा पहुंचा दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक, समय रहते हुआ सुरक्षित रेस्क्यू

टीपी नगर ट्रक स्टैंड में दिखा रंग-बिरंगा सांप, चालक ने वन विभाग को दी सूचना; RCRS टीम ने हाइड्रोलिक मशीन के पास से निकाला बाहर

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  टीपी नगर स्थित ट्रक स्टैंड में शुक्रवार को उस समय कौतूहल का माहौल बन गया, जब एक ट्रक चालक की नजर बेहद खूबसूरत और रंग-बिरंगे सांप पर पड़ी। सांप का रंग-रूप सामान्य सांपों से बिल्कुल अलग नजर आ रहा था। चालक अनिल निषाद भी सांप की पहचान नहीं कर सके। उन्होंने बिना देर किए इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग की ओर से RCRS (Reptile Care and Rescuer Society) की टीम से संपर्क किया गया, जिसके बाद मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सांप की पहचान दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक (Flying Snake) के रूप में की।

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सूचना मिलते ही RCRS के अध्यक्ष अविनाश यादव के साथ मनस, उमेश, सौम्य और अतुल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने स्थिति का निरीक्षण करने के बाद निर्धारित वन्यजीव रेस्क्यू प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सांप को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला।

हाइड्रोलिक मशीन के पास छिपा था सांप

रेस्क्यू टीम के अनुसार फ्लाइंग स्नेक ट्रक के पीछे लगे हाइड्रोलिक मशीन के पास बैठा हुआ था। मशीनरी के बीच सांप की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू आसान नहीं था। जरा सी चूक होने पर सांप ट्रक के किसी अन्य हिस्से में प्रवेश कर सकता था। यदि वह मशीनरी के अंदर चला जाता तो उसे तलाशना मुश्किल होने के साथ ही ट्रक के संचालन के दौरान उसके घायल होने या दबने का खतरा भी था।

RCRS की टीम ने बेहद सावधानी और सूझबूझ के साथ सांप को मशीनरी के पास से सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू की जानकारी तत्काल कोरबा वनमंडल अधिकारी जितेंद्र उपाध्याय को दी गई। उनके दिशा-निर्देश तथा उपवन मंडल अधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन्यजीव रेस्क्यू की प्रक्रिया पूरी की गई।

धरमजयगढ़ से कोरबा तक ट्रक के साथ किया सफर!

रेस्क्यू के बाद ट्रक चालक अनिल निषाद से जब जानकारी ली गई तो पता चला कि ट्रक सामान लेकर धरमजयगढ़, छाल और घरघोड़ा होते हुए कोरबा पहुंचा था। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि फ्लाइंग स्नेक रास्ते में किसी स्थान से ट्रक पर चढ़ गया होगा और इसके बाद चलते ट्रक के साथ ही सफर करते हुए कोरबा तक पहुंच गया।

खास बात यह रही कि ट्रक चालक की नजर समय रहते इस दुर्लभ वन्यजीव पर पड़ गई। यदि सांप मशीनरी के भीतर चला जाता या ट्रक के किसी हिस्से में छिपा रहता तो उसके रेस्क्यू में काफी परेशानी हो सकती थी। समय पर मिली सूचना और RCRS टीम की तत्परता से उसकी जान बच सकी।

बिना पंख के हवा में ग्लाइड करता है फ्लाइंग स्नेक

फ्लाइंग स्नेक प्रकृति की उन अनोखी प्रजातियों में शामिल है, जिसे देखकर पहली नजर में विश्वास करना मुश्किल होता है कि कोई सांप हवा में भी जा सकता है। हालांकि यह वास्तव में पक्षियों की तरह उड़ता नहीं है, बल्कि पेड़ों की ऊंचाई से छलांग लगाकर हवा में ग्लाइड करता है।

जब इसे एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाना होता है तो यह ऊंचाई से छलांग लगाता है और हवा में अपने शरीर को चपटा तथा चौड़ा कर लेता है। इसके बाद शरीर को विशेष तरीके से लहराते हुए हवा में अपनी दिशा नियंत्रित करता है और दूसरे पेड़ या स्थान पर उतर जाता है। शरीर की विशेष बनावट उसे हवा में ग्लाइड करने में मदद करती है।

भारत में Chrysopelea वंश के फ्लाइंग स्नेक पाए जाते हैं। पेड़ों पर रहने की आदत, आकर्षक रंग और हवा में ग्लाइड करने की असाधारण क्षमता इन्हें अन्य सामान्य सांपों से अलग बनाती है।

रेस्क्यू के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा

RCRS टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू के बाद फ्लाइंग स्नेक को उसके अनुकूल प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। इस दौरान वन विभाग एवं रेस्क्यू टीम ने लोगों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने, छेड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें।

वन्यजीव आवासीय अथवा शहरी क्षेत्र में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को सूचना दें। समय पर मिली सूचना से जहां वन्यजीव की जान बचाई जा सकती है, वहीं लोगों को भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।

वन्यजीवों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी

वन विभाग और RCRS ने कहा कि वन्यजीव हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मानव बस्तियों अथवा वाहनों में वन्यजीवों का पहुंचना कई बार उनके प्राकृतिक आवास से भटकने या अनजाने में वाहनों पर सवार होने के कारण होता है। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

RCRS हेल्पलाइन:
अविनाश यादव: 9827917848
7987957958
9009996789

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