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औद्योगिक नगरी कोरबा में उद्योगों की झांकियां रहीं नदारद, उद्योग मंत्री के गृह जिले में गणतंत्र दिवस समारोह में औद्योगिक झांकियों की गैर हाजिरी ने खड़े किए कई सवाल

छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिला प्रशासन द्वारा 26 जनवरी को सीएसईबी फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने ध्वजारोहण किया। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शासन की योजनाओं और विभागीय गतिविधियों को दर्शाती झांकियां निकाली गईं, लेकिन औद्योगिक नगरी कोरबा के किसी भी बड़े उद्योग की झांकी शामिल नहीं होना पूरे आयोजन में चर्चा का विषय बना रहा।

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उद्योग मंत्री का गृह जिला, फिर भी औद्योगिक पहचान गायब

कोरबा जिला प्रदेश के उद्योग मंत्री का गृह जिला होने के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता है। जिले में एशिया की सबसे बड़ी एसईसीएल की गेवरा कोयला खदान, दीपका और कुसमुंडा परियोजनाएं, सीएसईबी एवं अन्य पावर प्लांट, एनटीपीसी और बालको जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जो देश के कई राज्यों को ऊर्जा और एल्यूमिनियम जैसी अहम संसाधन उपलब्ध कराती हैं। इसके बावजूद गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उद्योगों की ओर से कोई झांकी या प्रस्तुति सामने नहीं आई।

झांकी के माध्यम से जनता को बताई जाती है सामाजिक भागीदारी

गणतंत्र दिवस समारोह में उद्योगों की झांकियां केवल औद्योगिक उत्पादन दिखाने तक सीमित नहीं होतीं। इन झांकियों के जरिए आमतौर पर यह जानकारी भी दी जाती है कि संबंधित उद्योग कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के प्रशिक्षण जैसे कार्यों पर कितना और कैसे खर्च कर रहे हैं। यह मंच उद्योगों के लिए जनता के सामने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों और विकास में भागीदारी को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

जनता तक नहीं पहुंची CSR और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी

उद्योगों की झांकी न होने के कारण यह जानकारी भी सामने नहीं आ सकी कि जिले में कार्यरत बड़े उद्योग किस मद में, कितनी राशि और किन क्षेत्रों में जनता के हित में खर्च कर रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या CSR के अंतर्गत किए जा रहे कार्य केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित हैं या वास्तव में उनका लाभ प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।

भूमि दी, आज भी रोजगार और सुविधाओं की प्रतीक्षा

जिले में स्थापित उद्योगों के लिए स्थानीय ग्रामीणों और भू-स्थापित परिवारों ने अपनी भूमि दी, लेकिन रोजगार, पुनर्वास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर असंतोष आज भी बना हुआ है। कई क्षेत्रों में इन्हीं मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर उद्योगों का मंच से दूर रहना, स्थानीय जनता के मन में उद्योगों के प्रति अविश्वास को और गहरा करता है।

उद्योगों की चुप्पी या प्रशासनिक समन्वय की कमी

अब यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या उद्योगों ने स्वेच्छा से इस राष्ट्रीय आयोजन में भाग नहीं लिया या फिर प्रशासन और उद्योग प्रबंधन के बीच समन्वय की कमी रही। जो भी कारण हो, औद्योगिक नगरी में उद्योगों की झांकी का नदारद रहना उद्योगों की सामाजिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

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