छत्तीसगढ़/कोरबा :- सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग एवं यातायात विभाग द्वारा संयुक्त रूप से मोटर अधिनियम के तहत स्कूल बसों की सघन फिटनेस जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले में संचालित कुल 70 स्कूल बसों की जांच की गई। अभियान का नेतृत्व स्वयं परिवहन विभाग अधिकारी विवेक सिन्हा ने किया और वे मैदान में उतरकर बसों की फिटनेस जांच करते नजर आए। 
जांच के दौरान चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं। अधिकांश बसों में साफ-सफाई का गंभीर अभाव पाया गया, वहीं कई बसों की सीटें फटी हुई मिलीं। बच्चों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे केवल खानापूर्ति के लिए लगे पाए गए और कई कैमरे चालू ही नहीं थे। 
सबसे गंभीर बात यह रही कि किसी भी स्कूल बस में हेल्प चाइल्ड लाइन नंबर अंकित नहीं पाया गया। इसके अलावा कई बसों के इमरजेंसी गेट जाम मिले, जबकि कुछ बसों के इंडिकेटर खराब थे जो जल ही नहीं रहे थे। यह सभी खामियां सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं। 
जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा ने बताया कि सभी स्कूल बस संचालकों को खामियां सुधारने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि तय समय-सीमा के बाद भी बसों में कमियां पाई गईं, तो परिवहन नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज करना स्कूल बस संचालकों को भारी पड़ेगा। इसी क्रम में जांच के दौरान निर्मला स्कूल की एक बस पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 1500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। परिवहन विभाग अधिकारी विवेक सिन्हा कहां है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और नियमों का पालन हर हाल में अनिवार्य होगा।

















