धान खरीदी की लिमिट बढ़ी, पर अव्यवस्था चरम पर
छत्तीसगढ़/कोरबा :- राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की लिमिट बढ़ाए जाने के बाद जहां एक ओर किसानों को राहत की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर मिलर्स की गंभीर लापरवाही के चलते धान मंडियों में अव्यवस्था का आलम देखने को मिल रहा है। मंडियों से समय पर धान का उठाव नहीं होने के कारण कई खरीदी केंद्रों में धान का भारी जाम लग गया है।
धान खरीदी केंद्रों में जगह की भारी कमी के चलते किसानों को अपने धान बेचने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई केंद्रों में स्थिति यह है कि नया धान रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है, जिससे किसानों को घंटों और कई बार दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मामले को और गंभीर बना रहा है मिलर्स द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे फटे-पुराने और घटिया बारदाने। इन जर्जर बारदानों के कारण जहां किसानों को बार-बार धान भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं फड़ प्रभारियों की सिरदर्दी भी लगातार बढ़ती जा रही है। मजबूरी में फड़ प्रभारियों को अतिरिक्त लेबर लगाकर बारदानों को सिलवाना पड़ रहा है, जिससे कार्य में देरी और अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।
फटे बारदानों के कारण कई बार धान जमीन पर गिर जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गिरे हुए धान की सफाई और दोबारा भराई में समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
इसी मकर संक्रांति के मद्देनज़र मौसम में बदली बनी हुई है। यदि ऐसे हालात में कहीं बारिश हो गई तो खुले में रखे धान के भीगने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे स्थिति और भी भयावह हो सकती है। बारिश से धान खराब होने की आशंका है, जिससे न केवल किसानों को भारी नुकसान होगा बल्कि शासन-प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।
किसानों और फड़ प्रभारियों का कहना है कि यदि जल्द ही मिलर्स द्वारा धान उठाव और गुणवत्तापूर्ण बारदानों की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकराल हो सकती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा—मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी या फिर धान उठाव में लापरवाही बरतने वाले मिलर्स?


















