HomeBreaking Newsपौष (पूस) मास में कैसा रहे खान-पान और दिनचर्या ?

पौष (पूस) मास में कैसा रहे खान-पान और दिनचर्या ?

छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने दी महत्वपूर्ण सलाह

“धनिये का सेवन न करें”, “अजवाइन-अदरक-लौंग अत्यंत लाभकारी”, “दूध व मेवे हितकारी”— डॉ. नागेंद्र शर्मा

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  हिंदी पंचांगानुसार पौष (पूस) मास 06 दिसंबर 2025 (शनिवार) से प्रारंभ होकर 03 जनवरी 2026 (शनिवार) तक रहेगा। इस अवधि को आयुर्वेद में विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि हेमंत ऋतु के इस अंतिम चरण में शरीर पर ठंड का अत्यधिक प्रभाव होता है। इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ के प्रख्यात नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने पौष माह में अपनाई जाने वाली आहार-विहार पद्धति को विस्तार से बताया।

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पौष माह में बढ़ता है वात-कफ, बढ़ती हैं मौसमी बीमारियां

डॉ. शर्मा के अनुसार पौष मास में ठंड और कोहरा बढ़ जाता है, दिन छोटे व रातें लंबी हो जाती हैं।
इस माह वात और कफ दोष का प्रकोप बढ़ता है, जिससे—
• जोड़ों का दर्द (संधिशूल)
• सूजन (संधिशोथ)
• सर्दी-खांसी
• कफजन्य ज्वर
• त्वचा रोग
जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

क्या खाएं — क्या बिल्कुल न खाएं?
क्या खाना चाहिए (पौष्टिक व स्निग्ध आहार)

• दूध
• मेवा (ड्राई फ्रूट्स)
• गुड़
• गेहूं, चावल, जौ
• तिल
• अजवाइन
• अदरक
• लौंग

क्या नहीं खाना चाहिए (वात-कफ बढ़ाने वाले पदार्थ)

• मांस-मदिरा
• बैंगन
• मूली
• मसूर दाल
• फूलगोभी
• उड़द दाल
• चीनी
• अत्यधिक तला हुआ भोजन

विशेष चेतावनी — पौष माह में धनिये का सेवन कदापि न करें

डॉ. शर्मा ने कहा कि धनिया इस माह शरीर में कफ-वात विकार को बढ़ाता है, इसलिए इसका पूर्ण त्याग करें।

जीवनशैली (Lifestyle) — क्या करें, क्या न करें
क्या करें

• अभ्यंग (सरसों, तिल आदि से तेल मालिश)
• स्निग्ध उबटन
• आतप स्नान (धूप सेवन)
• हल्के गुनगुने पानी से स्नान
• शरीर को ढककर रखें
• यथाशक्ति व्यायाम

क्या न करें

• दिन में अधिक समय सोना
• रात्रि में जागरण
• अनियंत्रित समय पर स्नान
• ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क में रहना

रसायन सेवन से बढ़ेगी शक्ति — डॉ. शर्मा की सलाह

हेमंत ऋतु को शक्ति संचय का काल बताया गया है। ऐसे में निम्न आयुर्वेदिक रसायन विशेष लाभदायक हैं—
• च्यवनप्राश
• अश्वगंधा पाक
• बादाम पाक
• आंवला
• शतावर
• विदारीकंद
• अकरकरा
• गोंद के लड्डू

इनका नियमित सेवन वर्षभर के लिए शरीर में बल, रोग प्रतिरोधक क्षमता और आरोग्यता बढ़ाता है।

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