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रेस्क्यू किए गए बीमार तेंदुए को नहीं बचा सका वन विभाग, करोड़ों खर्च करके जंगली जीवो की प्यास नहीं बुझा पा रहा वन विभाग

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  कटघोरा वन मंडल की ऐतमा वन परिक्षेत्र के ग्राम कोनकोना में ट्रेंकुलाइज किए गए तेंदुए की आज सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई है, करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी जंगली जीव प्यासे,
बीमार तेंदुआ को इलाज के लिए कल वन विभाग ने रेस्क्यू कर ट्रेंकुलाइज किया था। तेंदुए को बेहोश अवस्था में पिंजरे में डाल कटघोरा वन मंडल के कसनिया डिपो में रखा गया था। यहां कानन पेंडारी बिलासपुर के पशु चिकित्सक डॉक्टर चंदन अपनी टीम के साथ उसका इलाज कर रहे थे। तेंदुए के सेहत में सुधार नहीं होने पर रविवार रात करीब 9.30 बजे तेंदुए को कानन पेंडारी शिफ्ट कर दिया गया था। कानन पेंडारी में भी रात भर इलाज चला। बताया जाता है कि यहां आज सुबह तेंदुए ने दम तोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले यह माना जा रहा था कि गर्मी की वजह से तेंदुआ हीट स्ट्रोक का शिकार हो गया है बाद में इलाज के दौरान मैन एक्जाइटिस की बीमारी से ग्रसित होना पाया गया। वन विभाग के अफसर का कहना है कि पांच साल का तेंदुआ वयस्क था। काफी सुस्त होने की वजह से उसके शिकार की आशंका थी। साथ ही इलाज करना आवश्यक था। इसलिए तेंदुआ का रेस्क्यू किया गया था। यह बताना होगा कि कोनकोना के जंगल में तेंदुआ को खेत में सुस्त हालत में टहलते रविवार की सुबह ग्रामीणों ने देखा था। करीब आठ दिन पहले चैतमा वन परिक्षेत्र के ग्राम राहा के जंगल में बछड़े का शिकार किए जाने से नाराज एक किसान ने जहर देकर तेंदुए को मार डाला था। इस मामले में तीन आरोपितों को विभाग गिरफ्तार कर चुकी है मगर तेंदुए का अंग काट कर ले जाने वाले आरोपितों को अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। इस बीच तेंदुए की मौत की यह दूसरी घटना हो गई है। ट्रेंकुलाइज के बाद तेंदुए की हुई मौत से कई सवाल उठ रहे। वहीं इस मामले को लेकर वन विभाग में हडक़ंप मच गया है। डीएफओ कुमार निशांत ने तेंदुए के मौत की पुष्टि की है। अब सवाल उठता है कि शासन के द्वारा जंगली जीवों को गर्मी से बचाने और उनके लिए पीने के पानी पर अनेक योजनाओं के माध्यम से करोड़ों राशि खर्च की गई वन विभाग द्वारा जंगलों में डबरी व तालाब के माध्यम से वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था के तमाम उपाय किए गए लेकिन करोड़ो फूकने के बाद भी भीषण गर्मी में जंगली जानवरों के लिए ना तो पीने का पानी उपलब्ध हो पा रहा है और ना उनको गर्मी से बचाने जंगली जानवर पानी की तलाश में गांव की ओर भटक रहे हैं और कई जानवर भीषण गर्मी के कारण और पानी की कमी के कारण हीट स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं और इसी प्रकार बीमार होकर जंगली जानवर अपनी जान गवा रहे हैं ।

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