छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा जिले की पाली तानाखर विधानसभा में गुरुवार को हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर के अलावा किसी आदिवासी नेता को कोई खास तवज्जो नहीं मिली जबकि पाली तानाखार आदिवासी बहुल्य है और सुरक्षित शीट है उसके बावजूद आदिवासियों की पूछ परख नहीं हो रही राम दयाल उईके जो कांग्रेस के समय यहां से तीन बार विधायक थे उन्हें बोलने का भी मौका नहीं मिला वो मंच की पहली पंक्ति एकदम किनारे बैठे थे ,क्षेत्र में और भी युवा आदिवासी नेता मौजूद थे देवी सिंह टेकाम ,रघुराज सिंह यूईके श्याम लाल मरावी लेकिन पीछे पंक्ति में बैठे थे ,जिसकी चर्चा आदिवासी युवाओं में चल रही भले ही मजकिया तौर पर चल रही थी लेकिन उनके दिमाग में ये बात तो बैठ गई ,शायद यही कारण है की विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा यहां से एक बार भी जीत हासिल नहीं कर सकी ,ननकीराम ने तो यहां तक कह दिया की मुझे तो यहाँ बुलाते नही ,इससे जाहिर होता है की भाजपा में कही न कही आदिवासी वर्ग इस क्षेत्र में कुछ उपेक्षा का शिकार हो रहा है बात जो भी हो किंतु अब आदिवासी वर्ग की नई पीढ़ी आ गई है और उसके दिमाग में इस तरह के विचार आना और चर्चा करना किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा भी कर रहा है हालाकी इस बदलाव को समझने वाले भाजपा में मौजूद है लेकिन उनकी भी नही चल रही, और वह शांत हैं, इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले चुनाव में भाजपा के कोरबा संगठन में गुटबाजी देखने को मिल सकती है जिससे प्रत्याशियों वोट बैंक को नुकसान उठाना पड़ सकता है, और आदिवासियों के वोट इसका सीधा सबसे बड़ा फायदा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी या फिर कांग्रेस पार्टी को मिल सकता है, वैसे भी यह विधानसभा आदिवासियों और कांग्रेस का गढ़ माना जाता है जहां अब तक भाजपा की नइया पर नहीं हो पाई है ।



















