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कोर्ट को गुमराह कर हथियाना चाहते हैं बी ई ओ का पद

मामला विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा का उच्च न्यायालय में गलत हलफनामा देकर लिया स्टे, उच्च न्यायालय के स्टे के आधार पर डीईओ ने पुनः पदस्थ किया प्रभारी बीईओ को

छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा हमेशा से ही सुर्खियों में रहने वाला जिला शिक्षा विभाग अपने अलग-अलग विवादों के कारण संदेह के घेरे में हैं इस बार जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा बिना सही तरीके से जाने समझे हाई कोर्ट के स्टे के आधार पर प्रभारी बीईओ रहे प्राचार्य को पुनः बी ई ओ के पद पर पदस्थ कर दिया गया है जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा हुआ है

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ताजा मामला के अनुसार विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा में कुछ समय पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर लोकपाल सिंह जोगी पदस्थ थे उनके विरुद्ध लगातार प्रशासन को गंभीर शिकायत प्राप्त हो रही थी इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती रानू साहू के द्वारा लोकपाल सिंह जोगी को अपदस्थ कर उनके स्थान पर तात्कालिक व्यवस्था के तहत प्रभारी प्राचार्य के रूप में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिंद पुर के प्राचार्य अशोक चंद्राकर को प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदस्थ किया गया 30 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी आदेश के तहत लोकपाल सिंह जोगी को विकास खंड शिक्षा अधिकारी तखतपुर स्थानांतरित किया गया और उनके स्थान पर नियमित रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ए तम नगर के व्याख्याता कुम देश गोविल को विकास खंड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा नियुक्त किया गया शासन के उसी आदेश में प्रभारी बी ई ओ का काम देख रहे अशोक चंद्राकर का स्थानांतरण रणपुर जसपुर कर दिया गया लेकिन अशोक चंद्राकर के द्वारा शासन के इस आदेश की अवहेलना की गई और वह शासन के इस आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय चले गए यहां उन्होंने शासन के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की अशोक चंद्राकर की इस याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज करते हुए स्थानांतरण समिति को प्रेषित कर दिया जिसके बाद स्थानांतरण समिति के द्वारा भी अशोक चंद्राकर के अभ्यावेदन को निरस्त कर दिया गया स्थानांतरण समिति से अभ्यावेदन निरस्त होने के बाद अशोक चंद्राकर एक बार फिर उच्च न्यायालय पहुंचे और इस बार उच्च न्यायालय मैं गलत हलफनामा प्रस्तुत कर याचिका दायर की इस याचिका में उन्होंने उच्च न्यायालय को विकास खंड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा बताते हुए अपने स्थानांतरण के विरुद्ध स्टे ले लिया इस स्टे के पूर्व जिला प्रशासन के द्वारा अशोक चंद्राकर को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छिंद पुर विकासखंड कटघोरा भेजा गया था और वह वही कार्य करते हुए वेतन ले रहे थे यहां बताना होगा कि लोकपाल सिंह जोगी को बी ई ओ पोड़ी उपरोड़ा उनकी गंभीर शिकायतों के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा हटाए जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अशोक चंद्राकर को भेजा गया था लेकिन जब शासन से नियमित विकास खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में कुम देश गोविल की नियुक्ति कर दी गई तो अशोक चंद्राकर के द्वारा बीईओ पोड़ी उपरोड़ा बने रहने के लिए कई कूट रचित प्रयास किए जा रहे हैं हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद बिना देरी किए और बिना जाने समझे जिस तरह से जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भारद्वाज के द्वारा अशोक चंद्राकर को पुनः बी ई ओ पोड़ी उपरोड़ा पदस्थ किया है उस पर भी ना केवल कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि लेनदेन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता इस मामले में कलेक्टर को तत्काल पूरे मामले में संज्ञान लेकर आम जनों के बीच प्रशासनिक छवि को दुरुस्त करने की आवश्यकता है

क्या कहता है नियम

इस पूरे मामले में जिस तरह से प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी रहे अशोक चंद्राकर ने माननीय उच्च न्यायालय में गलत जानकारी देकर याचिका दायर की है उस पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं नियम के जानकारों के अनुसार जब भी किसी प्रशासनिक विभाग मैं किसी अधिकारी का स्थानांतरण होता है या शिकायत के आधार पर उन्हें हटाया जाता है तो जब तक शासन से नियमित अधिकारी पदस्थ नहीं होता तब तक कलेक्टर के द्वारा प्रभारी अधिकारी के रूप में व्यवस्था को चलाने के लिए वैकल्पिक नियुक्ति की जाती है जैसे ही नियमित अधिकारी का आदेश जारी होता है नियमानुसार प्रभारी अधिकारी अथवा कर्मचारी का दायित्व निभा रहे शख्स अपनी मूल जगह पदस्थ कर दिए जाते हैं लेकिन विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा में ना केवल इन नियमों की धज्जियां उड़ाई गई है बल्कि बिना जाने समझे जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा भी शासन के आदेश को दरकिनार कर प्राचार्य से प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी 1a अशोक चंद्राकर को पुनः पोड़ी उपरोड़ा का बी ई ओ बना दिया गया है यहां बता दें कि उच्च न्यायालय के द्वारा मामले की सुनवाई तक जो स्टे दिया गया है उसके तहत अशोक चंद्राकर अपने मूल दायित्व का कर्तव्य है निभा सकते हैं लेकिन उन्होंने उच्च न्यायालय को गुमराह कर यह पद हथिया लिया है इस मामले में अब आगे देखने वाली बात होगी कि जब सुनवाई पूरी होती है तो उच्च न्यायालय का फैसला क्या आता है

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा

यहां गौर करना होगा कि माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा अशोक चंद्राकर की याचिका पर जो स्थगन आदेश जारी हुआ है उसमें कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि अशोक चंद्राकर को विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर बने रहने का अधिकार है बल्कि यह स्थगन आदेश मामले की सुनवाई होने तक यथास्थिति बरकरार रखने के लिए है और यथास्थिति के तहत वर्तमान में अशोक चंद्राकर अपने मूल स्थान पर अर्थात प्राचार्य के पद पर कार्य कर रहे थे और वही से उनका वेतन आहरित हो रहा था अशोक चंद्राकर की कार्यशैली को लेकर भी कई शिकायतें आती रही हैं यही कारण है कि इस पूरे प्रकरण में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अशोक चंद्राकर को यहां से हटाने के लिए मोर्चा खोल दिया है

स्थगन के तहत किया पदस्थ

विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा मैं प्रभारी बी ई ओ रहे प्राचार्य अशोक चंद्राकर अपने स्थानांतरण के विरुद्ध उच्च न्यायालय गए हैं और माननीय न्यायालय ने सुनवाई पूरी होने तक स्थगन आदेश जारी किया है मैंने उच्च न्यायालय के इसी स्थगन के आधार पर उन्हें बीईओ पोड़ी उपरोड़ा पदस्थ किया है

जीपी भरद्वाज डीईओ कोरबा

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