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धनवर्षा के त्यौहार में मंदी से व्यापारी परेशान, ऊपर से विद्युत विभाग की मनमानी शहर में 4 से 5 घंटे बिजली गुल रहने से व्यापारियों में आक्रोश

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छत्तीसगढ़/कोरबा :-  कोरोना का कहर सभी त्योहारों पर पड़ा है। 2019 मार्च के बाद से जितने भी त्योहार आए हैं उनके रंग फीके ही नजर आए। कोरोना के डर के चलते त्योहारों का उत्साह भी देखने को नहीं मिला। लेकिन अब कोरोना काल खत्म होने के बाद सबसे बड़ा त्योहार आ रहा है। दिवाली से ही बाजार की रफ्तार बनी रहती है। गौरतलब है कि दिवाली पर ही मुख्य रूप से बाजार की अर्थव्यवस्था टिकी रहती है
इस त्योहार पर लगभग हर परिवार कुछ न कुछ खरीदारी जरूर करता है। ऐसे में दिवाली पर ही बाजार में धनवर्षा होती है।

कोरोना के इस काल के बीच अब व्यापारियों को दिवाली पर बाजार के रोशन होने की उम्मीद है। लेकिन कोरबा का व्यापारी वर्ग बिजली विभाग की मनमानी से काफी परेशान है। एक तो बरसात के पहले मेंटनेंस के नाम पर बिजली काटी जाती,,और अब दिवाली की समय भी इसी तरह का काम बिजली विभाग कर रहा है।

दीवाली को लेकर लगता है कि पहले के सब त्योहार फीके भले ही रहे लेकिन दिवाली कभी फीकी नहीं रहती। ऐसे में बाजार की मंदी को उबारने में दिवाली का सबसे बड़ा योगदान होगा। इसके लिए व्यापारियों ने तैयारियां पूरी कर ली है। लेकिन घंटो बिजली कटौती से व्यापारी सहित आम लोग खासे परेशान है।

वैसे कोरबा स्वयं ही ऊर्जाधानी है,, यहां पर बिजली समस्या दिया तले अधेरे की कहावत को चरितार्थ करता है,, कोरोना काल में सबसे ज्यादा नुकसान ऑटोमोबाइल सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक सामान,,सराफा,,बर्तन सहित सभी व्यापार को हुआ। दिवाली के लेकर अब जब दुकान सजकर तैयार है,,लेकिन व्यापारियों की कोशिश पर बिजली विभाग के अधिकारी पलीता लगा रहे है ।

जानकारी के अनुसार धनतेरस में पिछले सालों की तुलना में इस बार मंदी पूरी तरह से खत्म होने की संभावना है। दिवाली को देखते हुए दुकान भी सज चुके हैं।पर बिजली विभाग के कार्यशैली से कोरबा का व्यापारी वर्ग काफी परेशान है,,उनका कहना है की सीजन के समय ये सारे कार्य नही करने चाहिए,,या तो विभाग के कर्मचारी ये कार्य सीजन के पहले कर ले या फिर बाद में,,इस तरह दिवाली के मौके पर उन्हें बेवजह परेशान ना किया जाए। और उनकी तैयारियों पर पानी ना फेरा जाए। व्यापारियों का आक्रोश इस मुद्दे को लेकर बढ़ता जा रहा है । उन्होंने कहा है कि अगर बिजली कटौती 1 या 2 घंटे के होती तो बर्दाश्त कर लेते लेकिन रोज 5 से 6 घंटे की कटौती वह भी सीजन के मौके पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी । अगर बिजली विभाग ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाया तो आने वाले समय में कोरबा का व्यापारी वर्ग सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगा और इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विभाग की होगी।