छत्तीसगढ़/कोरबा :- पर्यावरणीय कारणों और लोगों की आपत्तियों के बाद कोयलांचल दीपका में गौरवपथ पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई थी। आश्चर्यजनक रूप से यहां फिर से आवाजाही शुरू कर दी गई। इससे लोगों का सिरदर्द बढ़ गया है। वहीं इस मामले को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। राज्य सरकार के नगरीय निकाय मद से नगर पालिका क्षेत्र में गौरवपथ का निर्माण करने के लिए कई करोड़ की राशि खर्च की गई। शहर के लोगों को इस क्षेत्र में बेहतर अनुभव हो, इसके लिए डिवाइडर लगाने के साथ पौधारोपण किया गया था। और भी अच्छे प्रयोग किये गए। इन सबके बावजूद गौरवपथ पर कोयला लोड भारी वाहनों का अनाधिकृत एकाधिकार सा हो गया और लगातार उनकी आवाजाही यहां से होती रही। ऐसे में इस रास्ते से होकर चलने में छोटे-बड़े वाहनों के साथ-साथ आम लोगों की परेशानियां बढ़ी। कई दुर्घटनाएं भी हुई इसके अलग भारी वाहनों के शोर और उनके चलायमान होने से मौके से उठने वाली कोल डस्ट आवासीय क्षेत्र को प्रदूषित करती रही। इस पर स्थानीय नागरिकों छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने विरोध दर्ज किया था। प्रशासन और प्रबंधन स्तर पर पत्राचार के बाद चक्काजाम करते हुए इस कुप्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किये गए। नतीजा यह हुआ कि गौरवपथ पर आवाजाही और नागरिकों को प्रदूषण से हो रही परेशानी को एनजीटी के प्रावधान के विरूद्ध माना गया। आखिरकार पिछले दिनों इस रास्ते से कई भारी वाहनों के चलने को प्रतिबंधित कर दिया गया था। खबर के मुताबिक चार दिन से पुराना ढर्रा फिर शुरू हो गया है। भारी वाहनों के कारण जो बदहाली गौरवपथ की हुई थी वह एक फिर यहां पर अपनी तस्वीर प्रदर्शित कर रही है। कई कंपनियों के वाहन गौरवपथ की दुर्दशा को बढ़ाने में लगे हुए हैं। नागरिक संगठनों ने जानना चाहा है कि पिछली आपत्तियों के बाद जिन कारणों से गौरवपथ को भारी वाहनों की आवाजाही के मामले में प्रतिबंधित किया गया था, उसे अब किस आधार पर समाप्त कर दिया गया है। लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि मौके पर स्वास्थ्य संबंधी जो परेशानियां पैदा हो रही है इस मामले में अधिकारी वर्ग उदासीन बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

















