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छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोरबा जिले में राजस्व विभाग का अब तक का आदिवासियों व राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की जमीन में सबसे बड़ी हेराफेरी, पटवारी दामोदर प्रसाद तिवारी ने आदिवासियों व पहाड़ी कोरवाओं की 100 एकड़ जमीन, जमीन मालिक के बिना बिक्री किए दलालों के नाम हस्तांतरित कर दिया, कलेक्टर से हुई शिकायत

मसाहति ( बिना नक्शा ) के गांव होने के कारण दामोदर प्रसाद तिवारी पूर्व पटवारी एवं कई दलाल व्यक्तियों ने फर्जी तरीके निजी जमीनों को बेच दिया है जिसे वापस दिलाये कलेक्टर से आदिवासियों ने लगाई गुहार

छत्तीसगढ़/कोरबा :- छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोरबा जिले में बीते 2 वर्षों में सरकारी जमीनों से लेकर आदिवासियों की जमीनों में भारी हेराफेरी की खबरें लगातार आ रही हैं, जिसका अब प्रमाण भी मिलने लगा है, पीड़ित गरीब आदिवासी अब प्रशासन के पास फरियाद लेकर पहुंचने लगे,  कलेक्टर जनदर्शन में 100 एकड़ आदिवासियों की जमीन के फर्जी तरीके से हस्तांतरित किए जाने का मामला सामने आया है हम इसको छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद आदिवासियों की जमीन में हेरा फेरी का सबसे बड़ा मामला कह सकते हैं क्योंकि इस प्रकार से जमीन की हेरा फेरी बड़े पैमाने का मामला पहले कभी प्रकाश में नहीं आया था और नाही इतनी बड़े पैमाने में जमीनों की हेराफेरी हुई है, इसके अलावा भी कई 100 एकड़ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे कर हेराफेरी करते हुए भू माफियाओं ने कोरबा जिले में अंजाम दिया है ।

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कोरबा जिले में बीते 2 वर्षों में पावर प्लांटों से निकलने वाली राख पाटकर कई एकड़ सरकारी जमीनों को जमीन दलालों द्वारा हथिया लिया गया है, एक जगह से दूसरे जगह जमीन पहुंचने की कई शिकायतें भी सामने आई हैं वही फर्जी तरीके से भोले-भाले आदिवासियों की जमीनों को धोखाधड़ी कर हस्तांतरित करवा लिया गया है जिसमें वह इस जमीन के माध्यम से कई वर्षों से अपना जीवन यापन कर रहे थे लेकिन अब अचानक उनको पता लगा कि वह उनकी जमीन नहीं रही, भारी तादाद में पहुंचे आदिवासियों के द्वारा कलेक्ट्रेट जनदर्शन में अपनी जमीन पटवारी दामोदर प्रसाद के माध्यम से जमीन दलालों को हस्तांतरित करने की शिकायत की गई है आपको बता दें कि कोरबा जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा सहित अनेक जनजाति आदिवासी निवास करते हैं वही कुछ अराजक तत्व व भू माफिया इन भोले-भाले आदिवासियों का फायदा उठाते हुए उनके जीवन से जुड़े अधिकारों से वंचित करते हुए उनके गरीबी के साथ खिलवाड़ कर रहा है, और रातों-रात आदिवासियों की जमीन की खरीदी बिक्री कर करोड़पति बन रहे हैं, आज भी कोरबा जिले में ऐसे कई आदिवासी परिवार अपनी रोजमर्रा जिंदगी जीने के लिए दो वक्त की रोटी के लिए मजबूर हैं, यही नहीं इनको चलाई जा रही शासन की योजनाओं का लाभ भी सही तरीके से नहीं मिल पा रहा, हालांकि शासन से पहाड़ी कोरबा व आदिवासियों के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन कोरबा जिले में ऐसा लगता है शासन की योजनाएं केवल हवा हवाई है और इनके लिए खर्च की गई शासन से राशि केवल कागजों में ही खर्च हो रही है, जबकि इनके लिए स्पेशल आदिवासी विकास विभाग भी बनाया गया है, लेकिन धरातल में इनके लिए कुछ नहीं किया जा रहा है इसकी एक वजह यह भी है की यह लोग ज्यादातर घनघोर जंगल के बीच में रहते हैं जहां आज भी सड़कों और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, इनके लिए शासन की योजनाएं पूर्ण रूप से नहीं पहुंच पा रही है, आज भी भारी तादाद में पहाड़ों में रहने वाले आदिवासी अशिक्षित हैं और ना ही समाज को आईना दिखाने वाले जंगली जानवरों के डर से इन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं यही कारण है कि आज भी यह अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए जिंदगी से जद्दोजहद करने पर मजबूर हैं प्रशासन भी इनकी सुध लेने में नाकाम है यही कारण है कि ऐसे लोग इनकी गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाते हुए इनका शोषण कर रहे हैं ।

मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे आदिवासी फरियादियों ने 10 बिंदुओं पर जानकारी देते हुए बताया कि पहाड़ी कोरबा व आदिवासियों की 100 एकड़ जमीन बिना उनकी जानकारी के पटवारी दामोदर प्रसाद तिवारी माध्यम से जमीन दलालों को हस्तांतरित किए जाने का मामला सामने आया है आज कलेक्ट्रेट जनदर्शन में भारी तादाद में पहाड़ी कोरवा जो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाते हैं और अन्य आदिवासियों के द्वारा कलेक्टर से शिकायत की गई है की हमारी बिना जानकारी के लगभग 100 एकड़ जमीन पटवारी दामोदर प्रसाद तिवारी के माध्यम से जमीन दलालों के नाम हस्तांतरित कर दी गई है ।

ग्रामीणों ने 10 बिंदुओं पर कलेक्टर से किए गए शिकायत पत्र में बताया है कि महोदय , विनम्र निवेदन है कि हम आदिवासी गरीब किसान ग्राम + पंचायत – पतरापाली , प.ह.नं. – 38 रा.नि.मं. – भैंसमा , थाना – बालको तहसील व जिला कोरबा छ.ग. के निवासी हैं तथा आवश्यक कार्यवाही हेतु निम्नानुसार निवेदन प्रस्तुत करते है

1. यह कि , मसाहति ( बिना नक्शा ) गांव होने के कारण आज से लगभग 25-30 वर्ष पूर्व प्रभावशाली व्यक्ति एस.एन. सिंहएवं प्यारा सिंह गोड़ में आदिवासी किसानों की जमीन लगभग 100 एकड़ जमीन को अपने नाम से फर्जी तरीके से काबिज करके रखा था जिसे दामोदर प्रसाद तिवारी ( पूर्व पटवारी ) , चन्द्रा अग्रवाल पिता अमर अग्रवाल ( रजगामार ) , अजीत कुमार चौधरी पिता आई.टी.पी. चौधरी ( कोरबा पतरापाली ) , विजय लकड़ा पिता रमू लकड़ा एवं अन्य दलाल व्यक्तियों द्वारा हम गरीब आदिवासी गरीब किसानों की जमीनों को मनमानी फर्जी तरीके से बेच दिया गया है जिससे हम आदिवासी गरीब किसान की आर्थिक एवं मानसिक स्थिति खराब हो गई है । जिसे उस जमीन को वापस करने का आदेश दिया जाये ।

2. यह कि , जितने भी दलाल करने वाल व्यक्ति हैं उनको हिरासत में लिया जावे ।

3 . यह कि , दामोदर प्रसाद तिवारी ( पूर्व पटवारी ) , उजित राम मांझी पिता जुगुत राम मांझी ( पतरापाली ) व नेतराम कंवर का पुत्र शुभरन सिंह कंवर ( ठाकुरखेता ) ने चन्द्रा अग्रवाल पिता अमर अग्रवाल ( रजगामार ) के पास जमीन की खरीदी बिकी किया गया है उसी के साथ चन्द्रा अग्रवाल पिता अमर अग्रवाल ( रजगामार ) ने चैतराम , भुखनलाल , दुखीराम , मंगल सिंह पिता लोहरी की जमीन को काबिज करके रखा गया है जिसके कारण अप्रिय घटना घटित होने की संभावना है इसके पूर्व वापस किया जाये ।
4. यह कि , दामोदर प्रसाद तिवारी , ( पूर्व पटवारी ) बिन्दा बाई ( पटवारी सदस्य पद ) एवं जोतराम ने खसरा नंबर 100 , 116 , 107 , 119 , 169 , जिसका रकबा 2.06 , 4.05 , 1.55 , 4.35 , 6.39 एकड़ है जिसे फर्जी तरीके से अपने चढ़वा लिया है जो कि पहले भुखन लाल चैतराम , दुखीराम मंगल सिंह का था उसे वापस किया जाये ।
5 . यह कि , बिना ग्रामवासी के ग्राम मुनियादी कराये बिना सीमांकन न किया जाये ।
6 . यह कि , दामोदर प्रसाद तिवारी ( पूर्व पटवारी ) ने कई किसानों की जमीन राजस्व खसरा नंबर एवं रकबा को फर्जी तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम पर आबंटित किया गया है जिसे वापस किया जाये ।
7 . यह कि , हमारे ग्राम पतरापाली में 1950 का फाइल ( रिकार्ड ) निकाल कर सीमांकन किया जाये ।
8 . यह कि , ग्राम पंचायत में बिना सरपंच सचिव व ग्राम पटेल एवं गांव के सदन सियान की हस्ताक्षर के बिना जमीनों को ले लिया गया है उस जमीन को निरस्त किया जाये या ( सुधार किया जाये )
9 . यह कि , कृष्चन उरांव लोग हमारे गांव में 9-10 साल पहले 3-4 लोग आये थे जो कि अपने परिवार एवं रिश्तेदारों को बुलाकर हमारे गांव के जंगल को कृष्चन उरांव लोग वन विभाग के कर्मचारी से मिलकर उजाड़ रहे हैं जो कि पहले हमारे गांव के जंगल पतरापाली बीट था अब उसे ठाकुरखेता बीट दे दिया गया है उस जंगल को वापस पतरापाली बीट दिया गये ताकि हम पतरापाली गांव के मूल आदिवासी निवासी हमारे गांव के जंगल को नष्ट होने से बचाया जा सके ।

10. यह कि , जंगल को बचाने हेतु वन अधिकारी समिति नियुक्त किया जाये और वन अधिकार समिति को फंड ( सहायता राशि ) दिया जावे ताकि जंगल को आग से , पेड़ – पौधे कि कटाई एवं नष्ट होने से बचाया जा सके तथा पेड – पौधे लगाकर एवं अन्य खर्च करके गांव वालों को रोजगार दिया जा सके एवं पलायन को रोका जा सकें । अतः आपसे निवेदन है कि उक्त बिन्दु के आधार पर किसी भी अप्रिय घटना घटित होने के पूर्व इस पर कार्य करने की कृपा करें ।

समोतीलाल सरपंच आवेदकगण ग्राम पंचायत – पतरापाला जनपद पंचायत कोरब ‘ जिला – कोरबा
समस्त ग्राम पंचायत पतरापाली
आदिवासी गरीब परिवार

राजाराम, बालकरामपंच, ननकुराम पाहाडी कोरबा, चैतराम, बोडराम, सुरितकुमार पहाडी कोरबा, मनीराम, बिहानू राम, प्रजाराम, नानदाऊ, अनि समारु , राजेश , रामकुंवर, पुनीराम, दुखीराम आदि ।

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