छत्तीसगढ़/कोरबा :- बालको चिमनी हादसे का वह भयानक मंजर याद कर आज भी रूह कांप जाती है आज ही की तारीख को 13 वर्ष पहले 23 सितंबर 2009 बालकों में चिमनी हादसा हुआ था जिसमें 41 लोगों के चिमनी के मलबे में दबकर मरने की जानकारी दी गई थी हालांकि स्थानीय श्रमिक नेता बीएल नेताम अल्मुनियम कामगार संघ एक्टू ने हादसे में 56 लोगों के मरने का दावा किया था जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की गई थी श्री नेताम ने बताया कि आज भी स्थानीय मजदूर भोला सिंह राजपूत जिनकी बालको चिमनी हादसे में मौत हो गई थी उसकी विधवा पत्नी को बालकों में स्थाई नौकरी देने का वादा किया था लेकिन आज 13 वर्ष गुजर जाने के बाद भी मृतक भोला सिंह राजपूत की पत्नी को बालको प्रबंधन बालकों में परमानेंट नौकरी नहीं दे पाया मृतक की पत्नी आज भी ठेका कंपनी में मजदूरी कर जीवन यापन कर रही है कुछ और स्थानीय मजदूर इस हादसे में अपनी जान गवाई थी हालांकि उनके परिजन सामने नहीं आए लेकिन इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में ज्यादातर बाहर के लोग थे शायद यही कारण रहा कि आज भी कई मजदूरों की पहचान शासकीय दस्तावेजों में नहीं दर्ज हो पाई और ना ही मृतकों को न्याय मिल पाया, आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र साहू ने बताया कि 23 चीनी नागरिकों का परिवहन विभाग द्वारा स्थाई लाइसेंस बनाया गया था लेकिन हादसे के बाद इनका भी अब तक पता नहीं चल पाया है,
बता दें कि बालको के निर्माणाधीन 1200 मेगावाट क्षमता वाले विद्युत संयंत्र में 23 सितंबर 2009 को चिमनी हादसा हुआ था मृतकों की संख्या कम बताई गई थी जानकारों की मानें तो इसके पीछे की वजह यह थी कि अगर मृतकों की संख्या ज्यादा घोषित की गई तो फैक्ट्री एक्ट के तहत बालको संयंत्र को बंद किया जा सकता था। इसी वजह से मृतकों संख्या दबाया गया था उस समय एक्टू नेता ने इस विषय को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की थी हादसे की जांच न्यायाधीश संदीप बख्शी आयोग ने भी की थी और सभी स्तर पर मृतक संख्या 41 ही बतायी गयी है। बख्शी आयोग की जांच रिपोर्ट में बालको प्रबंधन को दुर्घटना के लिए दोषी बताया गया था। दुर्घटना का कारण गुणवत्ताहीन सामाग्री का उपयोग किया जाना पाया गया था। जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में भी रखा गया था,
पुलिस ने भी किया था मामला दर्ज, लेबर कोर्ट में भी चला था मामला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बालको थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 377/09 धारा 304, 34 भादवि बालको प्रबंधन व अधिकारियों के विरूद्ध अपराध कायम कर विवेचना किया गया था विवेचना पर धारा 324, 326, 201 भादवि भी जोड़ी गई थी प्रकरण में बालको विरल मेहता, दीपक नारंग, अनूप महापात्र समेत सेपको के तीन, जीडीसीएल के 8 अधिकारी, कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया था। मामला सेशन कोर्ट में लंबित है। लेबर कोर्ट में चला यह मामला दुर्घटना की जांच के आधार पर काखाना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत कारखाना के अधिभोगी व संबंधितों को कारण बताओ सूचना जारी किया गया। लेबर कोर्ट कोरबा में अभियोजन के दो प्रकरण क्रमश: 119/2009 व 120/2009 दायर किए गए थे। सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने वाले दो आरोपी बालको के पूर्व सीईओ गुंजन गुप्ता और सेपको के चेयरमेन हाउ जुओजीन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ था। वहीं अन्य आरोपियों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था।
इन्हें बनाया गया था आरोपी
नाम पद
गुंजन गुप्ता डायरेक्टर, 1200 मेगावाट
पावर प्लांट, बालको
विरल मेहता प्रोजेक्ट इंचार्ज
हाउ जूओजीन चेयरमेन, सेपको
सचित बरन सरकार डायरेक्टर, जीडीसीएल
नारायण दास सराफ डायरेक्टर, जीडीसीएल
अशोक चंद बर्मन डायरेक्टर, जीडीसीएल
पराग चंदूलाल मेहता डायरेक्टर, जीडीसीएल
कमल महावीर प्रसाद डायरेक्टर, जीडीसीएल
वू छूनान प्रोजेक्ट मैनेजर, सेपको
मनोज शर्मा प्रोजेक्ट मैनेजर, जीडीसीएल











